मेरू पुष्ट श्री यंत्र मेरुपुष्ट श्री यंत्र का विवरण हमारे शास्त्रों वेद , पुराण वास्तुशास्त्र , योगिनी ह्दय ओर पुराने दुर्लभ ग्रंथो में मिलाता हे l मेरू पुष्ट श्री यंत्र हमारे जीवनको सुख समृधी देनेवाला यंत्र हे l श्री यंत्र माँ भगवती त्रिपुरसुन्दरी का यंत्र हे l इसलिए श्री यंत्र सभी यंत्र में सर्व श्रेष्ट मानाजाता हे l मनुष्य की भोतिक ओर आध्यात्मिक उन्नति को देने वाला हे l श्री यंत्रसमस्तयंत्रों में सर्वश्रेष्ठ है। ' योगिनी हृदय ' ग्रंथ के अनुसार आद्या शक्ति अपने बल से ब्रह्मा ण्ड का रूप लेकर स्वयं अपने स्वरूप को निहारती हैं तो वहीं से ' श्री चक्रों ' का प्रादुर्भाव होता है। इस यंत्र में उर्ध्वमुखी त्रिकोण , अग्नितत्व का , वृत्त वायु का , बिंदु आकाश का और भूपुर पृथ्वी तत्व का प्रतीक हैं। कुल मिलाकर यंत्रराज श्री यंत्रस्वयं में मानव शरीर का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि इस प्राणप्रचलित चैतन्य महायंत्र के सामने धनतेरस या दीपावली से आरंभ करके नित्य 16 पाठ श्री सूक्त के किए जाएं तो यह यंत्र धीरे - धीरे जागृत होने लगता है। ...