Main Entrance Door (मकान का मुख्य द्वार)
मकान के मुख्य द्वार का निर्माण सदैव वास्तु के अनुसार बताए गए शुभ पदों में ही करना शुभ होता है। मुख्य द्वार को स्थापित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह कभी भी भूखण्ड के बढ़े हुए अथवा कटे हुए भाग में ना हो। आवसीय अथवा व्यावसायिक किसी भी मकान के मध्य में मुख्य द्वार नहीं बनाना चाहिए। इस प्रकार के द्वार की स्थापना धार्मिक स्थलों के लिए ही अनुकूल होता है। मकान के मध्य में मुख्य द्वार बनाने से परिवार का नाश हो जाता है। मुख्य द्वार का निर्माण इस प्रकार करवाना चाहिए कि वह सदैव मकान के भीतर की ओर ही खुले एवं मुख्य द्वार मकान में बने अन्य द्वारों की तुलना में अधिक सुन्दर, भव्य व बड़ा होना चाहिए। साथ ही मुख्य द्वार में दहलीज अवश्य ब नाना चाहिए। मुख्य द्वार स्थापित करते समय यह ध्यान देना चाहिए कि मकान के पूर्व व पशिचम तथा उत्तर व दक्षिण दोनों दिशा में द्वार आमने-सामने नहीं होना चाहिए। मकान के मुख्य द्वार को कभी भी सड़क, गली अथवा किसी भी प्रकार के वेध के ठीक सामने स्थापित नहीं करना चाहिए। वेध से हटाकर मुख्य द्वार की स्थापना करना ही शुभ रहेगा। वास्तुशास्त्र के अनुसार द्वार की लम्बार...